शुक्रिया 🙏

माना अब “हम” साथ नहीं

पर यूँही मन बदल ,

आप कभी लौट आएं तो…… शुक्रिया

छुप कर ही सही

इस जमाने से दूर ,

अपना हमें बनाएं तो…… शुक्रिया

पता है जहां को मंजूर नही

मुकम्मल हमारा इश्क ,

हो जाए आप के ख्वाबों मे तो…… शुक्रिया

पल भर को सही

यूँही कभी तनहाई में ,

हम याद गर आजाएं तो…… शुक्रिया

खयालों में ही कहीं

अचानक हमारे जिक्र से ,

आप मुस्कुराएं तो……शुक्रिया

दरवाजे खुले हैं

हमारे दिल के, गर आप ,

खुद-बा-खुद हमें मनाएं तो….. शुक्रिया

आप लौट आएं तो…… शुक्रिया 🙏

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कुछ और बात है ….

नुुुपलललकततकररहोंठों पे हंसी थी जब थी ,

अब कुछ और बात है |

आंखों मे नमी थी जब थी ,

अब कुछ और बात है |

खोजते रहे हम उन्हें वो हमें ,

उसी जगह, उसी पहर, उसी समय ,

होने में होना उनका ना था

खोने में खोना मेरा ना था

प्यार था जब था ,

अब कुछ और बात है |

फिक्र थी मुझे उनकी मेरी उन्हें ,

हर घडी, हर शाम, हर सुबह ,

बात अच्छी थी जब थी

अब कुछ और बात है |📝

कलम उठाते हैं |

चलो आज कलम उठाते हैं ,

मन का सब कुछ केह जाते हैं |

आसान नही है , जीवन के रहस्यों को शब्दों में संजोना..

आसान नही है , अपनाना अजनबी को फिर उसे खोना…

चलो कोशिश कर भुलाते हैं,

मन का सबकुछ केह जाते हैं |

सब देखते हैं , मैने भी देखे ‘सपने’ साथ रहने के

नीदों मे रेह गये , हुए तो बस आंखों से बहने के..

चलो आंसुवों को सुलाते हैं ,

मन का सबकुछ केह जाते हैं |

आसान नहीं है , आप का आज और सिर्फ आज में रेहना…

आसान नहीं हैं , भूलना अतीत और फिर उन्हीं खयालों में खोना…

चलो दर्दों को जी जाते हैं ,

चलो कल आज में मिलाते हैं ,

चलो आज कलम उठाते हैं ,

मन का सबकुछ केह जाते हैं | 📝

मैं खुश हूं …..

मैं आबाद भी खुश थी ,

मैं बरबाद भी खुश हूं |

साहिल की चाह थी, नदी का किनारा सही ,

पार जाना तय था, लहरों का सहारा सही ,

कोटि-कोटि प्रणाम सहित, आभारी ईश्वर ‘उस’ हूँ |

मैं आबाद भी खुश थी,

मैं बरबाद भी खुश हूं |

मंजिल कहीं और थी, गलियां कहीं और है

पाने की बडी जल्दी थी, अब समय और है

मां-बा के सहयोग निहित,

तत्पर पथ ‘जिस’ हूं |

मैं आबाद भी खुश थी ,

मैं बरबाद भी खुश हूं |